नववर्ष









कुछ
भी तो नहीं बदला,
सबने एक-दूसरे को,
नववर्ष की शुभकामनाएं दीं,
कुछ मदिरापन हुआ कुछ केक कटे,
मोमबत्तियां जली और पटाखे छुटे,
पर दिल के भेद नहीं मिटे,
रात बीती और सुबह हुई,
बस कैलेण्डर बदल डाला|

No comments: