वजूद










दीन
भर दुनिया की भीड़ में,
उस कोलाहल की हल्दीघाटी में,
अपना वजूद कायम रखने की कोशिश में,
हर रोज महाराणा की हार होती है,
अकबर के हाथों,
स्वाभिमान का चेतक घायल होता है,
हारता नहीं,
फिर लौट आता है,
नयी सुबह में नए संगग्राम के लीये|

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